Gopal Sinha

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फितूर, कविता, दैनिक लेखनी प्रतियोगिता -19-Feb-2022

फितूर
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माता-पिता, गुरुजनों,
नारियों का सम्मान भरपूर,
शराफत यहाँ का दस्तूर,
कभी ऐसी-वैसी की घटनाएं,
कुछ उपद्रवियों के हैं फितूर,
समाज के लिए जो हैं नासूर।

जिम्मेदारियों का अहसास,
देश-प्रेम से वास्ता नहीं दूर,
सिर्फ खुदगर्जी और गुरूर,
रोज-रोज नये शगूफे छोड़ते हैं,
चालाक लोगों के दिमागी फितूर।

आपके चक्कर में हम,
क्यों बेवजह पिस रहे हैं ?
भला बताइए हमारा कसूर।

--- गोपाल सिन्हा,
    बंगलुरू,
    १९-२-२०२२

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6 Comments

Shrishti pandey

20-Feb-2022 09:34 AM

Very nice

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Gopal Sinha

20-Feb-2022 10:32 PM

धन्यवाद।

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Punam verma

20-Feb-2022 09:03 AM

Nice

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Gopal Sinha

20-Feb-2022 10:33 PM

धन्यवाद।

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Abhinav ji

19-Feb-2022 08:08 PM

Nice

Reply

Gopal Sinha

20-Feb-2022 10:33 PM

धन्यवाद।

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